Sunday, 22 January 2012

आज की काली तारीख २२ जनवरी

आज २२ जनवरी को काकोरी काण्ड
के आरोपी विस्मिल, अशफाक और
लाहिड़ी के साथ फांसी की सजा पाने
वाले ठाकुर रोशन सिंह (जन्म:१८९२-
मृत्यु:१९२७) का जन्म दिवस है .
असहयोग आन्दोलन के दौरान उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में हुए गोली-
काण्ड में एक पुलिस वाले की रायफल
छीनकर जबर्दस्त फायरिंग शुरू कर
दी थी जिसके कारण हमलावर पुलिस
को उल्टे पाँव भागना पडा।
मुकदमा चला और ठाकुर रोशन सिंह को सेण्ट्रल जेल बरेली में दो साल
वामशक्कत कैद
की सजा काटनी पडी थी । यद्यपि ठाकुर साहब ने
काकोरी काण्ड में प्रत्यक्ष रूप से भाग
नहीं लिया था फिर भी आपके
आकर्षक व रौबीले व्यक्तित्व
को देखकर काकोरी काण्ड के सूत्रधार
पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल व उनके सहकारी अशफाक उल्ला खाँ के
साथ १९ दिसम्बर १९२७ को फाँसी दे
दी गयी।
ठाकुर साहब बडे, अनुभवी, दक्ष व
अचूक निशानेबाज थे।
क्रांतिकारियों के पास विचार- धारा व दृष्टि के साथ-साथ
उत्साही नवयुवकों का बहुत
बडा संगठन था। हँ, अगर कोई
कमी थी तो वह कमी पैसे की थी। इस
कमी को दूर करने के लिये आयरलैण्ड
के क्रान्तिकारियों का रास्ता अपनाया गया और वह
रास्ता था डकैती का। इस कार्य
को पार्टी की ओर से ऐक्शन नाम
दिया गया था । ऐक्शन के नाम पर
पहली डकैती पीलीभीत जिले के एक
गाँव बमरौली में २५ दिसम्बर १९२४
को सूदखोर (ब्याज पर रुपये उधार देने
वाले) बल्देव प्रसाद के यहाँ डाली गयी।
इस पहली डकैती में ४००० रुपये और कुछ सोने-चाँदी के जेवरात
क्रान्तिकारियों के हाथ लगे। परन्तु
मोहनलाल पहलवान नाम का एक
आदमी, जिसने उनको ललकारा था,
ठाकुर रोशन सिंह की रायफल से
निकली एक ही गोली में ढेर हो गया। सिर्फ मोहनलाल की मौत ही ठाकुर
रोशन सिंह
की फाँसी की सजा का कारण बनी। ठाकुर साहब ने ६ दिसम्बर १९२७
को इलाहाबाद स्थित नैनी जेल
की काल-कोठरी से अपने एक मित्र
को पत्र में लिखा था :--"इस सप्ताह
के भीतर ही फाँसी होगी। ईश्वर से
प्रार्थना है कि वह आपको मोहब्बत का बदला दे। आप मेरे लिये रंज
हरगिज न करें। मेरी मौत
खुशी का बाइस होगी। दुनिया में
पैदा होकर मरना जरूर है। मेरी मौत
किसी प्रकार अफसोस के लायक
नहीं है। हमारे शास्त्रों में लिखा है कि जो आदमी धर्म युद्ध में प्राण
देता है उसकी वही गति होती है
जो जंगल में रहकर तपस्या करने वाले
ऋषि मुनियों की।"

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